महाराणा प्रताप के भाई शक्ति सिंह जी का इतिहास | History of Shakti Singh ji Sisodia

Shakti Singh Sisodia, also referred to as Shakta, Sakta or Sakat, was the son of maharana udai Singh ji and Sajja Bai Solankini and younger brother of Maharana Pratap. HALDIGHATI युद्ध के अन्तिम क्षणों में शक्तिसिंह जी ने बनास नदी के करीब पहुंचकर महाराणा प्रताप के पीछे आ रहे खुरासान खां और मुल्तान खां को मारकर अपना घोड़ा महाराणा प्रताप को भेंट किया | शक्ति सिंह जी ने क्षमा मांगी और महाराणा प्रताप के साथ मिलकर स्वामिभक्त चेतक की अन्तिम क्रिया की | महाराज शक्ति सिंह जी ने मेवाड़ के संघर्ष में अपना अमूल्य योगदान दिया, लेकिन इतिहास के पन्नो पर उनका नाम आज भी विश्वासघात के लिए लिया जाता है, जो कि सर्वथा अनुचित है लेकिन हम लोग उनको कैसे भूल सकते हैं वो हमारे पूर्वजों में से एक थे.

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